हड़प्पा सभ्यता का समय ~ Ancient India

हड़प्पा सभ्यता का समय

हड़प्पा सभ्यता(सिंधु घाटी सभ्यता) का समय-

हड़प्पा सभ्यता विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक है ।सिंधु नदी व उसकी सहायक नदियों के प्रदेशों में  इस सभ्यता का विकास हुआ था । कुछ विद्वान तो इसका समय 1000 वर्ष ई.पू. बताते हैं और कुछ विद्वान तो इसका समय 2500 ई.पू. मानते हैं।

डॉ.राजबली पाण्डेय ने इस सभ्यता का काल 5000 ई.पू. मना है।
डॉ. सी.ऐल. फ्रेबी ने इस सभ्यता का समय 2800 से 2500 ई.पू. मना है। डॉ.फ्रेंकफर्ट ने इसका काल 2800 ई.पू.माना है तथा डॉ.धर्मपाल अग्रवाल ने रेडियोकार्बन-14 परीक्षण प्रणाली के आधार पर इस सभ्यता का समय 2300 ई.पू.से 1750 ई.पू.बताया है।

यद्दपि सिंधु सभ्यता के उदय काल के विषय में विद्वानों में मतभेद हैं परंतु इसमें कोई संदेह नहीं की यह विश्व की प्रचीनतम सभ्यताओं में से एक है।


सिन्धु घाटी और हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख केन्द्र

सिन्धु घाटी में मोहन जोदड़ो और हड़प्पा ताम्र कांस्युगीन सभ्यता के प्रमुख केन्द्र थे । हड़प्पा के अवशेष इस सभ्यता के प्रमुख केन्द्र थे । हड़प्पा के अवशेष इस सभ्यता के विकसित और परिष्कृत रूप को प्रकट करते है । परन्तु हड़प्पा संस्कृति का विकास अचानक तथा पृथक रूप से नहीं हुआ था । पश्चिमोत्तर सीमान्त प्रदेश, बलूचिस्तान, सिन्ध एवं राजस्थान से प्राप्त अवशेषों से ज्ञात होता है कि सिन्धु घाटी सभ्यता के विकास के पूर्व भारतीय उपमहाद्वीप में एक ऐसी संस्कृति विद्यमान थी, जिसे हम सिन्धु घाटी सभ्यता की पूर्ववर्ती संस्कृति मान सकते है । इस संस्कृति को ‘प्राग हड़प्पा’ या पूर्व हड़प्पा या प्रारम्भिक हड़प्पा संस्कृति की संज्ञा दी गयी है । इस सभ्यता को हडप़्पा नाम इसलिये दिया गया क्योंकि इसके प्रथम अवशेष सन् 1921 में पश्चिम पंजाब के हड़प्पा क्षेत्र में पाये गये । दो प्रसिद्ध पुरातत्व शास्त्रियों राखलदास बनर्जी तथा दयाराम साहनी ने पंजाब के मान्टगोमरी जिले में स्थित हड़प्पा और सिन्ध के लरकाना जिले में स्थित जोदड़ो में इस सभ्यता के अवशेष खोजे ।


हड़प्पा वासी सुनियोजित नगरों में रहते थे और लेखन कला का विकास कर चुके थे । दुर्भाग्यवश हम अभी तक इस लिपि का अर्थ नहीं निकाल सके हैं । हड़प्पा सभ्यता के लोग कृषि और वस्तुकला के क्षेत्र में भी निपुण थे । सम्भवत: मेसोपोटामिया व पश्चिम एशिया के कुछ अन्य देशों के साथ उनके व्यापारिक संबंध थे । 2,5000 र्इ.पू. के लगभग मिश्र की नील नदी घाटी में, मेसौपोटामिया की टिंगरिस व यूफेंटीस नदी घाटी में, चीन की हंवागहो नदी घाटी में और भूमध्य सागर और एशियन सागर के सीमावर्ती क्षेत्रों में कर्इ सभ्यताओं का विकास हुआ । लगभग इसी समय सिन्धु घाटी भी एक विकासशील सभ्यता का केन्द्र थी ।

सिन्धु-सभ्यता काल के विषय में पयार्प्त मतभदे है । विभिन्न इतिहासकार उसका समय 2500 र्इ.पू. से 5000 र्इ.पू. तक निश्चित करते है । सर जॉन मार्शल इसे 500 र्इ.पू. की सभ्यता मानते है । हरिदत्त वेदालंकार इसका समय 3000 र्इ.पू. निर्धारित करते है । डॉं. राधा कुमुद मुकर्जी और श्री अर्नेस्ट मैके इस सभ्यता का समय 3250 र्इ.पू. से 2750 र्इ.पू. ठहराते है ।

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