Shakya Dynasty ~ कौन हैं शाक्य ? ~ Ancient India

Shakya Dynasty ~ कौन हैं शाक्य ?

शाक्य वंश का इतिहास

  • 'शाकवृक्षप्रतिच्छन्नं वासं यस्माच्च चक्रिरे,
  • तस्मादिक्ष्वाकुवंशास्तेभुवि शाक्या इति स्मृताः।
'साक' या सागौन के वृक्षों के आधिक्य के कारण यहां रहने वाले लोग साक्य कहलाये। सागौन या (सागवन) से हि साक्य (शाक्य) शब्द कि उत्पत्ति हुई होगी। साक के पेड़ के बहुतायत के कारण यहाँ रहने वाले लोग साक्य कहलाये। साकिया शब्द का उल्लेख सम्राट अशोक के शिलालेख में भी मिलता है जिसमें उन्होनें खुद को साक्य कुल का बताया है। साक- साक्य (शाक्य) ये प्रदेश साक के पेड़ो के बाहुल्यता के कारण शाक्य गणराज्य कहलाया। या यूं कह लें साक वन में रहने वाले लोग साक्य कहलाये और साक वन का पूरा क्षेत्र साक्य गणराज्य कहलाया।
नेपाल में और नेपाल से सटे उत्तर भारत में आज भी इन पेड़ों कि बाहुल्यता पाई जाती है। नेपाल में साक वन अभी भी है जिसे नेपाल कि ठेठ भाषा में सकुवा वन कहते है। इस तरह ये प्रदेश शाक्य गणराज्य के नाम से जाना जाने लगा था। जब शाक्यो का विस्तार हुआ तो इन्होंने एक राजधानी कि स्थापना कि जिसका नाम कपिलवस्तु रखा। आगे चल कर ये वंश दुनियां का सबसे महान वंश कहलाया। इस वंश कि दूसरी शाखा मौर्य वंश ने बाद में विश्वविजय का खिताब हासिल किया।विदूडभ के आक्रमण के दौरान राज परिवार के लोग विभिन्न प्रदेशों में विभिन्न आजीविका अपना कर रहने लगे जैसे :

  • फूलों की खेती
  • साग सब्जी उगाना
  • खेती करना इत्यादि
कालान्तर में शाक्यों को सैनी, माली, कुशवाहा, कोईरी, काछी, मुराव, महतो इत्यादि उपजातियों के नाम से जाना जाने लगे ।

प्राचीन भारत का शाक्य जनपद

शाक्य जनपद प्रथम शताब्दी ई.पू. में प्राचीन भारत के जनपदों में से एक था। बौद्ध पाठ्यों के अनुसार शाक्य (संस्कृत: सक्य, देवनागरी: शाक्य, पाली: सक्य) जाति एक प्राचीन हिंदू सूर्यवंशी क्षत्रिय वंश है । शाक्य जाति का गोत्र गौतम है जोकि एक ब्राह्मण गोत्र है । शाक्य वंश प्राचीन और मध्ययुगीन काल के दौरान दक्षिण एशिया क्षेत्र में राज करने वाले कई हिंदू क्षत्रिय राजवंशों में से एक है।शाक्यों का हिमालय की तराई में एक प्राचीन राज्य था, जिसकी राजधानी कपिलवस्तु थी, जो अब नेपाल में है। सबसे प्रसिद्ध शाक्यों में आते हैं शाक्यमुनि बुद्ध, यानी गौतम बुद्ध।

ये लुंबिनी के एक राजवंश से थे और इन्हें शाक्यमुनि, पाली में साकमुनि, आदि नामों से जाना जाता है। विरुधक/विदूडभ द्वारा कपिलवस्तु में शाक्यों के नरसंहार करने के बाद जो शाक्य लोग बच गए, वह कपिलवस्तु के उत्तर में अवस्थित पहाडीयों में छुप कर रहने लगे। 
पहाडीयों में ही शाक्यों को काठमांडू के सांखु (शंखपुर) में किरात नरेश जितेदास्ती के समय में बौद्ध भिक्षुऔं द्वारा बनाया हुआ वर्खाबास विहार के बारे में पता चला। इस के बाद शाक्य वंश के लोग उस विहार में शरणागत हो गए। वहां से शाक्यों ने संघ का फिर से निर्माण किया और विभिन्न विहारों का निर्माण किया।

कालान्तर में नेपाल में 500 से ज्यादा बौद्ध विहार और अध्ययन केन्द्रों का निर्माण हुआ। यह संस्कार से निर्मित बौद्ध सम्प्रदाय को नेवार बौद्ध सम्प्रदाय कहते है। इस सम्प्रदाय के नेपाल में 100 से भी ज्यादा बिहार अभी भी जीवित है। बाकी के सभी जीवित बौद्ध सम्प्रदाय से भिन्न इस सम्प्रदाय की धार्मिक भाषा पाली है।

सभी ग्रन्थ और कर्म पाली के मन्त्र और सूत्र द्वारा किया जाता है। नालन्दा और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों मे लिखित अनेक ग्रन्थ (जो भारत में अभी लुप्त हो चुका है), जैसे कि प्रज्ञापारमिता, पाली त्रिपिटक आदि इस सम्प्रदाय में जीवित है।
विश्व गुरु तथागत गौतम बुध्द शाक्य गणराज्य के राजा शुद्धोधन शाक्य के पुत्र थे । शाक्य वंश की एक शाखा जो पिप्लीकानन वन में निवास करने लगी जो आगे चलकर मौर्य से प्रसिद्ध हुई । इस वंश में अखंड भारत के निर्माता चक्रवर्ती सम्राट राष्ट्रनायक चन्द्रगुप्त मौर्य व् सम्पूर्ण दुनिया में धम्म , नैतिकता , सदाचार का सन्देश देने वाले विश्व के महानतम शासक अशोक महान् हूए । जिनके द्वारा भारत वर्ष की वैश्विक पहचान बनी ।
शाक्य जाति शाक्य नाम के अतिरिक्त इन नामों से भी जानी जाति है : मौर्य, सिंघाला  (श्रीलंका) शाक्य जाति के ज्यादातर लोग भारत (उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान), नेपाल, तिब्बत, श्रीलंका और म्यांमार (बर्मा) में रहते हैं | शाक्य सम्प्रदाय की एक बहुत छोटी संख्या प्राचीन काल से चीन, जापान और वियतनाम में भी रहती आ रही है। शाक्य वंश ने दक्षिण एशिया के विभिन्न भागों में, विभिन्न समय पर तथा विभिन्न नामों से अपना शासन कई बार स्थापित किया । उदाहरण के लिए:

(1.) शाक्य गणराज्य (1500-500 ईसा पूर्व) :

उत्तर भारत और नेपाल में शासन किया। उल्लेखनीय शासकों में राजा शुद्धोधन, राजकुमार सिद्धार्थ और राजा राहुल थे। राजकुमार सिद्धार्थ शाक्य ने राजपाठ छोड़ कर एक नए धर्म की स्थापना की । यह धर्म बुद्ध धर्म के नाम से जाना गया तथा सिद्धार्थ शाक्य को भगवान् गौतम बुद्ध के नाम से जाना जाने लगा ।

(2.) मौर्य साम्राज्य (322 - 185 ईसा पूर्व) :

भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और चीन के कुछ दक्षिणी हिस्सों में शासन किया। उल्लेखनीय शासकों में चंद्रगुप्त मौर्य, और सबसे प्रसिद्ध शासक सम्राट अशोक थे।

(3.) बर्मी राजशाही (800 ईसा पूर्व):

म्यांमार (बर्मा) में शासन किया। उल्लेखनीय शासकों में सम्राट अभिराज शाक्य थे ।

(4.) सिन्हाला साम्राज्य / अनुराधापुरा राज्य  (437-1017 ईसा पूर्व) :

श्रीलंका में शासन किया। उल्लेखनीय शासकों में महाराज पाण्डुखाभ्या थे ।

शाक्य वंश के बारे में विस्तार से जानने के यहाँ क्लिक करें

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2 comments

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Unknown
admin
25 अप्रैल 2021 को 10:16 pm बजे ×

abhi ke samay me shaky in name shankhwar, shakywar, shankhwansi, shaky, aadi ke nam se jane jate h

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बेनामी
admin
9 मई 2021 को 11:21 pm बजे ×

लोगों को चूतिया बनाना बंद करो असली शाक्य वर्तमान में कोली जिन्हें कोलिय कहते है । उनमें से शाक्य , शक्यावार, शक्यवाल और शंखवार है । जो आपने बताए वो काछी कुशवाह है

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