नालंदा विश्वविद्यालय का इतिहास: स्थापना, विनाश और रोचक तथ्य
परिचय
भारत प्राचीन काल से ही ज्ञान, शिक्षा और संस्कृति का विश्व गुरु रहा है। जब दुनिया के कई हिस्सों में औपचारिक शिक्षा प्रणाली की शुरुआत भी नहीं हुई थी, तब भारत में नालंदा विश्वविद्यालय जैसे महान शिक्षण संस्थान स्थापित हो चुके थे।
यह केवल एक विश्वविद्यालय नहीं था, बल्कि ज्ञान, दर्शन, चिकित्सा, गणित, खगोल विज्ञान और साहित्य का अंतरराष्ट्रीय केंद्र था। इसने लगभग 700 वर्षों तक पूरे एशिया में ज्ञान का प्रकाश फैलाया।
नालंदा विश्वविद्यालय कहाँ स्थित है?
नालंदा विश्वविद्यालय वर्तमान बिहार राज्य के नालंदा जिले में स्थित है, जो राजधानी पटना से लगभग 90 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में है। आज यह स्थान भारत के सबसे प्रमुख ऐतिहासिक एवं यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थलों में से एक है।
नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना किसने की?
इतिहासकारों के अनुसार, नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना 5वीं शताब्दी ईस्वी (लगभग 427 ईस्वी) में
'नालंदा' शब्द का अर्थ: संस्कृत में 'नालंदा' का अर्थ "ज्ञान देने वाला" अथवा "जिसके ज्ञान का कभी अंत न हो" (ना + अलम् + दा) होता है।
विश्व का पहला पूर्ण आवासीय विश्वविद्यालय
नालंदा को दुनिया का पहला अंतरराष्ट्रीय आवासीय विश्वविद्यालय (Residential University) माना जाता है।
मुफ्त शिक्षा: यहाँ विद्यार्थियों के रहने, भोजन और पढ़ाई का पूरा खर्च राजाओं एवं दानदाताओं द्वारा उठाया जाता था।
विशाल क्षमता: यहाँ 10,000 से अधिक विद्यार्थी और 1,500 से ज्यादा आचार्य (शिक्षक) एक साथ रहते और अध्ययन करते थे।
कठिन प्रवेश परीक्षा: प्रवेश द्वार पर ही द्वारपाल (विद्वान) मौखिक परीक्षा लेते थे, जिसमें केवल योग्य 20-30% विद्यार्थियों को ही प्रवेश मिलता था।
नालंदा में पढ़ाए जाने वाले प्रमुख विषय
नालंदा सिर्फ बौद्ध दर्शन ही नहीं, बल्कि हर तरह के उच्च ज्ञान का केंद्र था:
धर्म एवं दर्शन
: बौद्ध दर्शन, वेद और उपनिषद विज्ञान एवं गणित: खगोल विज्ञान (Astronomy), गणित और ज्योतिष
चिकित्सा: आयुर्वेद एवं शल
्य चिकित्सा (Surgery) भाषा एवं तर्क: संस्कृत व्याकरण, तर्कशास्त्र (Logic) और राजनीति विज्ञान
विश्व प्रसिद्ध पुस्तकालय: 'धर्मगंज'
ना
यह तीन विशाल 9-मंजिला इमारतों में फैला था:
रत्नसागर
रत्नोदधि
रत्नरंजक
यहाँ लाखों दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियाँ और ग्रंथ सुरक्षित थे, जिन्हें पढ़ने के लिए देश-विदेश से विद्वान आते थे।
विदेशी यात्रियों का आगमन: ह्वेनसांग और ई-त्सिंग
ह्वेनसांग (Xuanzang): प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग ने यहाँ 5 वर्षों तक शिक्षा ग्रहण की और यहाँ की अनुशासन प्रणाली तथा
शिक्षा स्तर का विस्तृत वर्णन अपने यात्रा वृत्तांत में किया। ई-त्सिंग (Yijing): एक अन्य चीनी विद्वान जिन्होंने नाल
ंदा के नियम और आचार-व्यवहार पर महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज लिखे।
नालंदा विश्वविद्यालय का विनाश कैसे हुआ?
सन 1193 ईस्वी
पुस्तकालय में आग: खिलजी ने 'धर्मगंज' पुस्तकालय में आग लगा दी। कहा जाता है कि पुस्तकालय में इतनी पुस्तकें थीं कि यह आग 3 महीने तक जलती रही।
ज्ञान की क्षति: इस बर्बर आक्रमण में हजारों अमूल्य ग्रंथ और प्राचीन ज्ञान हमेशा के लिए नष्ट हो गए।
आधुनिक नालंदा विश्वविद्यालय
आज प्राचीन नालंदा के अवशेष UNESCO विश्व धरोहर का हिस्सा हैं। 21वीं सदी में भारत सरकार द्वारा 2014 में नए 'नालंदा विश्वविद्यालय' की पुनः स्थापना की गई है, जहाँ आज भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध और अध्ययन कार्य जारी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना कब और किसने की थी?
Q2. नालंदा विश्वविद्यालय के पुस्तकालय का क्या नाम था?
Q3. नालंदा विश्वविद्यालय को किसने जलाया था?
