सूर्य और चंद्र ग्रहण (Solar & Lunar Eclipse): कारण और प्रकार

 

सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण कैसे लगता है? जानिए इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण, प्रकार और रोचक तथ्य

सूर्य और चंद्र ग्रहण (Solar and Lunar Eclipse) वैज्ञानिक कारण


बचपन से हम सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के बारे में सुनते आए हैं। पहले के समय में इन घटनाओं को रहस्यमय माना जाता था। कई जगहों पर लोग इन्हें शुभ या अशुभ संकेत मानते थे। लेकिन विज्ञान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ग्रहण एक पूरी तरह प्राकृतिक और खगोलीय घटना है, जिसका अंधविश्वास से कोई संबंध नहीं है।

जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं, तब ग्रहण की स्थिति बनती है। इस लेख में हम जानेंगे कि सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण कैसे लगता है, इनके प्रकार क्या हैं, ग्रहण हमेशा क्यों नहीं लगता और इससे जुड़े कई रोचक वैज्ञानिक तथ्य।


ग्रहण क्या होता है?

ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जिसमें एक खगोलीय पिंड दूसरे पिंड की रोशनी को कुछ समय के लिए आंशिक या पूर्ण रूप से ढक देता है।

मुख्य रूप से दो प्रकार के ग्रहण होते हैं—

  • सूर्य ग्रहण
  • चंद्र ग्रहण

दोनों की प्रक्रिया अलग-अलग होती है, लेकिन दोनों में सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की स्थिति सबसे महत्वपूर्ण होती है।


सूर्य ग्रहण कैसे लगता है?

सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है।

इस स्थिति में चंद्रमा सूर्य की रोशनी को कुछ समय के लिए पृथ्वी तक पहुँचने से रोक देता है। परिणामस्वरूप पृथ्वी के कुछ हिस्सों में सूर्य पूरा या आंशिक रूप से ढका हुआ दिखाई देता है।

सूर्य ग्रहण केवल अमावस्या के दिन ही संभव होता है।


चंद्र ग्रहण कैसे लगता है?

चंद्र ग्रहण तब लगता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है।

इस स्थिति में पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, जिससे चंद्रमा कुछ समय के लिए पूरा या आंशिक रूप से ढका हुआ दिखाई देता है।

चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा की रात को लगता है।


हर अमावस्या और पूर्णिमा पर ग्रहण क्यों नहीं लगता?

यह सबसे सामान्य प्रश्नों में से एक है।

चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की कक्षा से लगभग 5 डिग्री झुकी हुई है। इसलिए अधिकांश समय सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा बिल्कुल एक सीध में नहीं आते।

ग्रहण तभी लगता है जब तीनों पिंड लगभग एक ही सीधी रेखा में आ जाते हैं।


सूर्य ग्रहण के प्रकार

1. पूर्ण सूर्य ग्रहण

जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक देता है, तो पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देता है। इस दौरान दिन में भी कुछ समय के लिए अंधेरा हो सकता है।


2. आंशिक सूर्य ग्रहण

जब सूर्य का केवल कुछ भाग ही ढकता है, तो इसे आंशिक सूर्य ग्रहण कहते हैं।


3. वलयाकार सूर्य ग्रहण

जब चंद्रमा सूर्य के बीच में होता है लेकिन उसका आकार सूर्य को पूरी तरह ढकने के लिए पर्याप्त नहीं होता, तब सूर्य के चारों ओर चमकदार छल्ला दिखाई देता है।


चंद्र ग्रहण के प्रकार

पूर्ण चंद्र ग्रहण

इसमें पूरा चंद्रमा पृथ्वी की छाया में आ जाता है।


आंशिक चंद्र ग्रहण

इसमें चंद्रमा का केवल कुछ भाग ही पृथ्वी की छाया में आता है।


उपच्छाया चंद्र ग्रहण

इस प्रकार के ग्रहण में चंद्रमा पृथ्वी की हल्की छाया से गुजरता है, इसलिए इसे पहचानना कठिन होता है।


इतिहास से एक रोचक उदाहरण

प्राचीन भारत, चीन और यूनान सहित कई सभ्यताओं में ग्रहण को दैवीय घटना माना जाता था। लेकिन समय के साथ खगोलविदों ने ग्रहों और चंद्रमा की गति का अध्ययन किया और यह समझाया कि ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है। आज वैज्ञानिक कई वर्षों पहले तक यह सटीक बता सकते हैं कि ग्रहण कब और कहाँ दिखाई देगा।


क्या सूर्य ग्रहण को सीधे देखना सुरक्षित है?

नहीं।

सूर्य ग्रहण के दौरान भी सूर्य की तीव्र किरणें आँखों को नुकसान पहुँचा सकती हैं। इसलिए इसे केवल प्रमाणित सोलर व्यूइंग ग्लास या विशेष फ़िल्टर की सहायता से ही देखना चाहिए।


क्या चंद्र ग्रहण देखना सुरक्षित है?

हाँ।

चंद्र ग्रहण को बिना किसी विशेष चश्मे के सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है, क्योंकि इसमें सूर्य की हानिकारक किरणें सीधे आँखों तक नहीं पहुँचतीं।


ग्रहण से जुड़े रोचक तथ्य

  • सूर्य ग्रहण पृथ्वी के बहुत छोटे क्षेत्र से ही दिखाई देता है।
  • चंद्र ग्रहण पृथ्वी के बड़े हिस्से से देखा जा सकता है।
  • पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ समय के लिए दिन में रात जैसा अंधेरा हो जाता है।
  • पूर्ण चंद्र ग्रहण के समय चंद्रमा कई बार लाल रंग का दिखाई देता है, जिसे ब्लड मून भी कहा जाता है।
  • वैज्ञानिक ग्रहण का समय कई वर्षों पहले ही गणना कर सकते हैं।

निष्कर्ष

सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण प्रकृति की अद्भुत खगोलीय घटनाएँ हैं, जो सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की विशेष स्थिति के कारण होती हैं। इनका किसी शुभ या अशुभ घटना से कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं है। सही जानकारी हमें अंधविश्वास से दूर रखती है और ब्रह्मांड को बेहतर ढंग से समझने में मदद करती है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

सूर्य ग्रहण कब लगता है?

जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है।

चंद्र ग्रहण कब लगता है?

जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है।

क्या हर अमावस्या को सूर्य ग्रहण लगता है?

नहीं। क्योंकि तीनों पिंड हर बार एक सीध में नहीं होते।

क्या सूर्य ग्रहण को बिना चश्मे के देख सकते हैं?

नहीं। इससे आँखों को गंभीर नुकसान हो सकता है।

क्या चंद्र ग्रहण देखना सुरक्षित है?

हाँ, चंद्र ग्रहण को बिना किसी विशेष उपकरण के सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है।